आइए जानते हैं बरवाला कांड के बारे में
बरवाला कांड 18 नवंबर 2014 को हुआ था मगर शुरू हुआ था 2006 में जी हा 2006 में जब संत रामपाल जी ने महर्षि दयानंद की लिखी हुई किताब सत्यार्थ प्रकाश संत रामपाल जी ने खोलकर जो दिखाया इसमें तो ऐसे निराधार बातें लिखी हैं जिसको अगर समाज ग्रहण कर ले तो नास्तिक बन जाए और ए बात आर्य समाजीयो को बहुत बुरी लगी जब संत रामपाल जी ने सत्य प्रकाश को टीवी पर खोल कर जनता के सामने दिखाने लगे तब आर्य समाजीयो ने अपनी चाल चली कि कैसे संत रामपाल जी के इस ज्ञान को रोका जाए तब उन्होंने अपनी फौज तैयार करके कृपा
करौथा आश्रम पर हमला बोल दिया मगर लाख कोशिशों के बाद भी आश्रम तक नहीं पहुंच पाए फिर अपने प्रयास में असफल रहे इसलिए उन्होंने एक अपने हाथों से अपने ही साथी को गोली मार दिया जो की मेडिकल रिपोर्ट में बिल्कुल साबित भी हो चुकी थी कि गोली उसे बिल्कुल नजदीक से मारी गई है जबकि वह लोग आश्रम से लगभग 100 किलोमीटर दूर थे और गोली लगभग 10 से 15 मीटर से चली हुई थी फिर उल्टा केस उन्होने संत रामपाल जी पर लगवाया दिया और 21 महीने जेल में रहने के बाद जब संत रामपाल जी महाराज जेल से बाहर आए और फिर उन्होंने अपना सत्संग चालू कर दिया और 2009 में उन्होंने हिंदुस्तान के सभी धर्मगुरुओं को आमंत्रित किया था कि आओ हमसे बच्चा करो और हम में कमी हो तो वह बताओ और आप में कमी हो तो अपनी गलती स्वीकार करो क्योंकि ऐसे मनुष्य जीवन किसी का बर्बाद मत करो क्योंकि मानव जीवन बहुत मुश्किल से मिलता है मगर कुछ लोगों ने तो आने से इंकार कर दिया कुछ लोग आए जो हार कर गए जो हार कर गए उन्होंने भी अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए साजिश में शामिल हुए और जो नहीं आए वह लोग भी उन्होंने सोचा क्यों ना संत रामपाल जी को मरवा दिया जाए ताकि हमारी सच्चाई जनता के सामने ना आए और फिर भी उन्होंने साजिश रच कर बरवाला कांड कराया
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