दूसरी बात श्रीमद् देवी भागवत मैं वेदव्यास जी के द्वारा
पेज नंबर 428 वेदव्यास जी खुद कह रहे हैं की गंगा नहाने से शरीर का मैल तो धुल जाता है मगर मन का मैल धो दे इतनी शक्ति नहीं उसके लिए उन महापुरुषों की सत्संग की जरूरत है और इस पृथ्वी पर इस टाइम में एक सिर्फ संत रामपाल जी महाराज हैं शास्त्र अनुकूल भक्ति करवा रहे हैं अतः सभी भाइयों से हाथ जोड़कर निवेदन है की अपनी शास्त्रों की अध्ययन करें क्योंकि आज समाज पढ़ा-लिखा है और खुद फैसला करें श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में गीता ज्ञान दाता ने खुद कहा है कि अर्जुन तू तत्वदर्शी संत के पास जा उस को दंडवत प्रणाम कर ओ जैसा उपदेश दे ऐसा कर
और उसी श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 15 श्लोक 1 से लेकर 4 तक उस तत्वदर्शी संत की पहचान बताइए


